Thursday, December 8, 2011

10 बार 400 पार, चार बार हिन्दुस्तान...

एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में बहुत-से रिकॉर्ड छिपे हैं, और रोज़ नए बनते भी हैं, लेकिन कुछ रिकॉर्ड ऐसे हैं, जो बार-बार होने के बावजूद बेहद रोमांचित कर देते हैं... गुरुवार को ऐसे ही एक रिकॉर्ड में बेहद महत्वपूर्ण योगदान दिया भारतीय सलामी बल्लेबाज़ और कप्तान वीरेन्द्र सहवाग ने, जब उन्होंने मेहमान वेस्ट इंडीज़ टीम के खिलाफ इंदौर के होल्कर स्टेडियम में कुल 149 गेंदों का सामना करके 25 चौकों और सात छक्कों की मदद से 219 रन बनाए, और इस आतिशबाज़ी जैसी पारी की बदौलत टीम इंडिया ने मेहमानों के खिलाफ निर्धारित 50 ओवर में 418 रन ठोक डाले...

भारत के 418 रनों में आधे से भी अधिक का योगदान देने वाले सहवाग ने इस पारी में न सिर्फ मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के एक पारी में सर्वाधिक नाबाद 200 रनों के रिकॉर्ड को तोड़ा, बल्कि किसी भी पारी में 25 चौकों के रिकॉर्ड की बराबरी भी की...

एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह कारनामा अब तक सिर्फ 10 बार हो पाया है, जब किसी टीम ने 400 या अधिक रन बनाए हों... उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि इन 10 पारियों में से चार बार यह कारनामा टीम इंडिया ने ही किया है... भारत की इन पारियों के अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका ने दो-दो बार तथा न्यूज़ीलैण्ड और ऑस्ट्रेलिया ने एक-एक बार यह कारनामा किया है...

(एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक खेली गई 400 रनों अथवा उससे अधिक की पारियों की सूची सबसे नीचे देखें...)

कुल 10 अवसरों में से आठ बार 400 रनों का आंकड़ा मैच की पहली पारी में छुआ गया, जबकि लक्ष्य का पीछा करते हुए यह अनूठी उपलब्धि सिर्फ दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका ने हासिल की है, जिनमें से दक्षिण अफ्रीका ने तो मैच भी जीता... इसी रिकॉर्ड से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि 400 रनों के इस विशाल अंबार तक पहुंचने के बाद भी श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया वे दुर्भाग्यशाली टीमें रही हैं, जो मैच हार गईं...

आइए, एक नज़र डालते हैं, गुरुवार, 8 दिसम्बर, 2011 की इस पारी सहित सभी 10 पारियों पर तारीखवार नज़र...

पहली बार...
एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार 12 मार्च, 2006 को कंगारू (ऑस्ट्रेलिया) टीम ने इस जादुई आंकड़े को छुआ था...
भ्रमणकारी कंगारुओं ने जोहानिसबर्ग में कप्तान रिकी पोन्टिन्ग के मात्र 105 गेंदों में बनाए तेजतर्रार 164 रनों के अलावा एडम गिलक्रिस्ट, साइमन कैटिच तथा माइकल हसी के अर्द्धशतकों की मदद से चार विकेट के नुकसान पर 434 रनों का पहाड़ खड़ा कर दिया, जिसके बाद मेज़बान दक्षिण अफ्रीका की हार निश्चित मान ली गई, लेकिन चमत्कार होना बाकी था...

दूसरी बार...
रनों के इस तत्कालीन सबसे बड़े अंबार का पीछा करते हुए मेज़बान टीम को तीन रन के कुल स्कोर पर पहला झटका भी लगा, परंतु उसके बाद कप्तान ग्रीम स्मिथ (55 गेंद, 90 रन) का साथ देने क्रीज़ पर पहुंचे हर्शल गिब्स ने पासा पलट दिया, और 111 गेंदों का सामना कर 21 चौकों और सात गगनभेदी छक्कों की मदद से 175 रन ठोक डाले...
रही-सही कसर विकेटकीपर बल्लेबाज़ मार्क बाउचर ने अपने अर्द्धशतक से पूरी कर दी, और मेज़बान टीम ने एक गेंद शेष रहते ही नौ विकेट पर 438 बनाकर न सिर्फ यह मैच एक विकेट से जीता, बल्कि 2-2 से बराबर चल रही शृंखला भी अपने नाम कर ली...

तीसरी बार...
एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर श्रीलंका टीम के नाम दर्ज है, जिसे उन्होंने नीदरलैण्ड के खिलाफ वर्ष 2006 में ही 4 जुलाई को बनाया...
नीदरलैण्ड के एम्सटेलवीन में खेली गई इस पारी में विस्फोटक सनत जयसूर्या ने 104 गेंदों पर 157 तथा तिलकरत्ने दिलशान ने 78 गेंदों पर 117 रनों की नाबाद पारी खेली और 50 ओवर में नौ विकेट के नुकसान पर 443 रन ठोक डाले, जिसके जवाब में मेज़बान टीम 48.3 ओवर में 248 रनों पर ढेर हो गई...

चौथी बार...
चौथी बार यह आंकड़ा फिर दक्षिण अफ्रीका ने पार किया, जब वे वर्ष 2006 में 20 सितम्बर को भ्रमणकारी जिम्बाब्वे की टीम के खिलाफ अपने ही घर में पोचेफ्स्ट्रूम के मैदान में खेल रहे थे, और मेज़बान टीम ने इस पारी में पांच विकेट के नुकसान पर 418 रन बनाए...
इस पारी में विकेटकीपर बल्लेबाज़ मार्क बाउचर ने तूफानी प्रदर्शन करते हुए 68 गेंदों की अपनी पारी में 10 छक्के और आठ चौके मारे, तथा कुल 147 रन बनाकर आखिर तक नाबाद रहे... बाउचर के अलावा पारी को 400 के पार ले जाने में लूट्स बोसमैन, अल्वीरो पीटरसन तथा तत्कालीन कप्तान जैक कैलिस के अर्द्धशतकों का भी योगदान रहा...
जवाब में जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 50 ओवरों में चार विकेट के नुकसान पर कुल 247 रन ही बना पाई, और अंततः 171 रन से मैच हार गई...

पांचवीं बार...
क्रिकेट विश्वकप के दौरान सिर्फ एक ही बार 400 रनों का आंकड़ा किसी टीम ने छुआ है, और वह भारत है...
वर्ष 2007 के वेस्ट इंडीज़ में खेले गए विश्वकप में बांग्लादेश और श्रीलंका से मिली हार की बौखलाहट में टीम इंडिया ने 19 मार्च को पोर्ट ऑफ स्पेन के मैदान में अपने ग्रुप की सबसे कमजोर टीम बरमूडा के खिलाफ पांच विकेट के नुकसान पर 413 रन ठोके...
इस पारी में वीरेन्द्र सहवाग ने 87 गेंदों पर 114 रन बनाए, जबकि सौरव गांगुली ने 114 गेंदों में 89, युवराज सिंह ने मात्र 46 गेंदों का सामना कर 83 रन, तथा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने 29 गेंदों में 57 रन ठोके...
जवाब में बरमूडा की टीम 43.1 ओवर में कुल 156 के योग पर ऑलआउट हो गई, और भारत ने यह मैच 257 रनों के विशाल अंतर से जीता...

छठी बार...
वर्ष 2008 में 1 जुलाई को स्कॉटलैण्ड के एबरडीन मैदान में आयरलैण्ड की टीम के खिलाफ कीवी टीम (न्यूज़ीलैण्ड) ने सलामी बल्लेबाज़ों जेम्स मार्शल तथा ब्रैंडन मैककुलम के बेहतरीन शतकों की मदद से दो विकेट के नुकसान पर 402 रनों का स्कोर बनाया...
इसमें जेम्स मार्शल ने 141 गेंदों का सामना कर चार छक्कों और 11 चौकों की मदद से 161 रन बनाए, जबकि ब्रैंडन मैककुलम ने कुल 135 गेंदों में 10 छक्कों और 12 चौकों की मदद से 166 रन ठोके...
जवाब में आयरलैण्ड की कमज़ोर टीम 28.4 ओवर में कुल 112 रनों के योग पर ऑलआउट हो गई, और न्यूज़ीलैण्ड ने यह मैच 290 रनों के विशाल अंतर से जीता...

सातवीं बार...
400 रनों की सबसे पहले और दूसरे नंबर पर खेली गई पारियों की तरह ही सातवीं और आठवीं पारियां भी एक ही मैच में खेली गईं, परंतु इस बार लक्ष्य का पीछा कर रही टीम जीत से वंचित रह गई...
वर्ष 2009 में भारतीय दौरे पर आई श्रीलंकाई टीम के खिलाफ राजकोट में 15 दिसम्बर को खेले गए शृंखला के पहले मैच में टीम इंडिया ने वीरेन्द्र सहवाग के 102 गेंदों में बनाए 146 रन, तथा सचिन तेंदुलकर व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अर्द्धशतकों की मदद से निर्धारित 50 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 414 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया...

आठवीं बार...
जवाब में उपुल तरंगा और तिलकरत्ने दिलशान ने मेहमान टीम को अकल्पनीय शुरुआत दी और पहले विकेट के लिए 188 रनों की शानदार साझेदारी कर ली...
दिलशान ने अपनी शानदार पारी में 124 गेंदों पर 160 रन ठोके, जबकि तरंगा और कप्तान कुमार संगकारा ने क्रमशः 67 और 90 रनों का योगदान दिया...
आखिरी गेंद तक बेहद रोमांचक बने रहे इस मैच में अंततः मेहमान टीम को कामयाबी हासिल नहीं हो पाई, और वे 50 ओवर में आठ विकेट पर 411 रन ही बना पाए...

नवीं बार...
इससे पहले भी आखिरी बार 400 रनों को छूने का कारनामा टीम इंडिया ने ही किया था, जब वर्ष 2010 की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीकी टीम भारतीय दौरे पर आई थी...
ग्वालियर में 24 फरवरी को खेले गए शृंखला के इस दूसरे मैच में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक और चमत्कारिक उपलब्धि भी हासिल की थी, जब उन्होंने एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार दोहरा शतक ठोका था...
सचिन के नाबाद 200 रनों के अलावा दिनेश कार्तिक ने 79, और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कुल 35 गेंदों में 68 रनों का योगदान दिया, जिसकी मदद से भारत ने तीन विकेट के नुकसान पर 401 रन बनाने में कामयाबी हासिल की...
जवाब में मेहमान टीम एबी डिविलियर्स की 114 रनों की खूबसूरत पारी के बावजूद 42.5 ओवर में कुल 248 रन पर ऑलआउट हो गई, और टीम इंडिया ने यह मैच 153 रनों से जीता...

दसवीं बार...
वर्ष 2011 के आखिरी महीने की 8 तारीख को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में मेहमान वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ खेले गए पांच मैचों की शृंखला के चौथे मैच में भारतीय सलामी बल्लेबाज़, मैन ऑफ द मैच और कप्तान वीरेन्द्र सहवाग ने कुल 149 गेंदों का सामना करके 25 चौकों और सात छक्कों की मदद से विश्व रिकॉर्ड 219 रन बनाए, और इस आतिशबाज़ी जैसी पारी की बदौलत टीम इंडिया ने मेहमानों के खिलाफ निर्धारित 50 ओवर में 418 रन ठोक डाले... सहवाग के अलावा इस पारी में गौतम गंभीर के 67 और सुरेश रैना ने भी 55 रनों का योगदान दिया...
जवाब में मेहमान टीम के विकेटकीपर दिनेश रामदीन की 96 रनों की जुझारू पारी के अलावा कोई खिलाड़ी संघर्ष भी नहीं कर पाया, और पूरी टीम 49.2 ओवर में 265 रन बनाकर ढेर हो गई, और मेज़बान टीम इंडिया ने मैच 153 रन से जीत लिया...
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