Monday, September 5, 2011

कहां से, कैसे पार करनी चाहिए सड़क...

सार्थक स्कूल से लौटा तो बेहद घबराया हुआ था... इत्तफाक से मैं घर पर था, सो, मुझे देखते ही मुझसे कसकर लिपट गया, और बोला, "पापा, पापा... वहां एक आदमी के सिर से बहुत सारा लाल-लाल खून निकल रहा है..."

मैं भागा-भागा बाहर तक गया तो देखा, मेरे घर से कुछ ही दूरी पर सड़क के बीचोंबीच एक आदमी पड़ा है, जिसके सिर से बुरी तरह खून बह रहा है, सारी सड़क सुर्ख हो चुकी थी... भागकर मैंने अपनी कार उठाई, और कुछ तमाशबीनों की मदद से उस व्यक्ति को सीधा अस्पताल ले गया, जहां डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए उसका इलाज शुरू कर दिया...

उसकी किस्मत अच्छी थी, वक्त पर ऑपरेशन हो जाने की वजह से उसकी जान बच गई, लेकिन क्या पता, कितने मासूम सड़कों पर ही दम तोड़ देते हैं...

मैं रात को घर वापस पहुंचा, तो सार्थक ने पूछा, "उन अंकल को क्या हुआ था, पापा...?"

मैंने बिल्कुल शांत स्वर में उसे बताया, "बेटे, उन अंकल को एक कार वाले ने टक्कर मार दी थी, इसलिए उनके सिर पर काफी चोट लग गई थी... अब डॉक्टरों ने उनके सिर पर पट्टी बांध दी है, इसलिए वह ठीक हो जाएंगे, लेकिन अभी कई दिन लगेंगे..."

सार्थक ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, "लेकिन कार वाले अंकल को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था क्या...?"

मैं तब तक सड़क पर मौजूद तमाशबीनों में से अस्पताल पहुंचे कुछ लोगों से पूरी बात जान चुका था, सो, बोला, "बेटे, सारी गलती कार वाले अंकल की भी नहीं है... जिन अंकल को चोट लगी थी, वह गलत जगह से सड़क पार कर रहे थे... इसलिए उनकी टक्कर हुई..."

सार्थक के चेहरे पर हैरानी के भाव आए, और मुझसे बोला, "गलत जगह का मतलब...?"

मैं मुस्कुराया, और बेटे को बताया, "बेटे, सड़क पार करने के लिए हर चौराहे पर जेब्रा क्रॉसिंग बनी होती है, और पैदल लोगों को वहीं से सड़क पार करनी चाहिए..."

अब सार्थक के चेहरे पर उत्सुकता के भाव थे, बोला, "जेब्रा क्रॉसिंग क्या होती है, पापा...?"

मैंने फिर बताया, "बेटे, चौराहों के पास सड़कों पर जो काली-सफेद पट्टी रंग से बनी होती है, उसी को जेब्रा क्रॉसिंग कहते हैं... और सड़क पार करने के लिए वही सही जगह होती है... इसके अलावा रेड लाइट के बारे में तुम जानते ही हो... जब बत्ती लाल हो तो रुक जाना चाहिए..."

मेरी बात को बीच में ही काटकर उत्साहित स्वर में सार्थक बोला, "हां, पापा... हमारी मैडम ने भी सिखाया था... लाल बत्ती पर रुकना चाहिए, पीली बत्ती पर ध्यान ने देखना चाहिए, और हरी बत्ती हो जाने पर ही चलना चाहिए... और मैडम ने कहा था, जैसे गाड़ियों के लिए लालबत्ती होती है, वैसे ही पैदल चलने वालों के लिए भी हर चौराहे पर बत्ती लगी होती है, जिसके हरे होने पर ही सड़क पार करनी चाहिए... अब मैं यह भी याद रखूंगा कि हरी बत्ती हो जाने पर भी सड़क जेब्रा क्रॉसिंग से ही पार करनी चाहिए..."

मैंने मुस्कुराकर उसके सिर पर हाथ फिराया, और उठकर जाने ही लगा था, लेकिन सार्थक के सवाल इतनी जल्दी कहां खत्म होने वाले थे, वह बोला, "पापा, पापा... अगर आपको मैं नहीं बताता, और आप उन अंकल को डॉक्टर अंकल के पास नहीं ले जाते, तो वह भगवान जी के पास चले जाते न...?"

मैं बेहद उद्वेलित हो उठा, और बोला, "हां बेटे... अगर तुम मुझे नहीं बताते तो ऐसा ही होता..."

सार्थक ने मेरी बात को ध्यान से सुना और उसका अगला सवाल था, "लेकिन फिर कोई और अंकल आपसे पहले उन अंकल को डॉक्टर के पास क्यों नहीं ले गया...?"

मैं क्या जवाब देता, फिर भी बोला, "बेटे, शायद सब अपने-अपने काम से जा रहे होंगे, इसलिए जल्दी में होंगे... लेकिन आपको कभी कोई ऐसा हादसा दिखाई दे, तो तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाना..."

सार्थक हंसकर बोला, "जी पापा, मैं जरूर अस्पताल ले जाऊंगा..."

बस, मैंने उसे सीने से लगाया, और खाना खाने चल दिए...

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इस आलेख की अगली दो कड़ियां भी पढ़ें...


* क्या करें, जहां जेब्रा क्रॉसिंग न हो...
* परियों की नहीं, ट्रैफिक की कहानी सुनी सार्थक ने...

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2 टिप्पणियां...:

  1. Bhai saheb, aap bhi kamaal aur apka samjhane ka tareeka bhi kamaal. Tere samjhane ka tarika, mera matlab is tarah ke vartalaap ke zariye, bahut hi achchha hai. Dil se chahti hoon ki zyada se zyada log padhe aur apne bachchon ko padhwayen. Kyoki bachcho ko lecture se zyada kahani achchi lagti hai. :)

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  2. Shukriya behna... Vaise yeh article bachchon ke liye hi likha tha... Actually, ek sanstha hai (www.wfar.org), jo schools mein bachchon ko traffic rules ke prati jaagrook karna chahti hai, aur ek campaign chala rahi hai... Public schools ke liye English mein unke paas content tha, lekin Hindi ke liye mujhe approach kiya, aur isi style mein kuchh likhkar dene ke liye anurodh kiya tha... Unki ek member ne mera likhe kuchh articles pehle bhi padhe the, so, unki ichchha thi, isi style mein likhkar doon... :-)

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